Slide 1

व्यवस्थापन

व्यवस्थापन

केंद्र सरकार को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध करानी थी तथा परियोजना का क्रियान्वयन दिल्ली राज्य सरकार के माध्यम से किया जाना था। हालांकि, दिल्ली राज्य सरकार ने इस योजना को अपने स्तर पर क्रियान्वित करने में असमर्थता व्यक्त की और सुझाव दिया कि इस पार्क का विकास केंद्र सरकार द्वारा किया जाए तथा इसे पूर्ण रूप से संचालित स्थिति में दिल्ली सरकार को सौंप दिया जाए। चूंकि वन्यजीवों का प्रबंधन वन विभाग द्वारा किया जाता था, इसलिए पार्क के प्रथम कार्यान्वयन अधिकारी की नियुक्ति वन सेवा से की गई। उत्तर प्रदेश के वन अधिकारी श्री एन. डी. बछखेती को 1 अक्टूबर, 1955 को अधीक्षक नियुक्त किया गया।

पार्क के विकास के लिए विस्तृत योजना तैयार करने में सहायता हेतु तत्कालीन सीलोन जूलॉजिकल गार्डन, कोलंबो के निदेशक मेजर वाइनमैन को आमंत्रित किया गया। उन्होंने एक रिपोर्ट के साथ प्रारंभिक योजना प्रस्तुत की। चूंकि वे आगे के परामर्श के लिए उपलब्ध नहीं हो सके, इसलिए प्रसिद्ध हैम्बर्ग एनिमल पार्क, पश्चिम जर्मनी के स्वामी श्री कार्ल हेगनबेक की सेवाएं लेने का निर्णय लिया गया। उन्होंने खुले खंदक (ओपन मोट) वाले बाड़ों की अवधारणा प्रस्तुत की।

श्री कार्ल हेगनबेक ने मार्च, 1956 में एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा जलमार्गों, सड़कों एवं पगडंडियों, पशु-बाड़ों और सीवेज प्रणाली का एक सामान्य लेआउट प्लान उपलब्ध कराया। स्थानीय परिस्थितियों और स्थलाकृति को ध्यान में रखते हुए इस योजना में आवश्यक संशोधन किए गए। भारत सरकार ने 31 दिसंबर, 1956 को संशोधित योजना को अनुमोदित किया।

वर्ष 1959 के अंत तक निर्माण कार्य पर्याप्त रूप से प्रगति कर चुका था। क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में सड़कें, जलमार्ग, खंदक, तालाब, बाड़ तथा पशु आवासों का निर्माण किया जा चुका था। लॉन विकसित किए गए और वृक्षारोपण का कार्य भी पूरा कर लिया गया था। दिल्ली में एक प्राणी उद्यान की स्थापना की घोषणा के साथ ही विभिन्न राज्य सरकारों तथा व्यक्तियों द्वारा पशु-पक्षियों को उपहार स्वरूप भेजा जाने लगा। इन पशु-पक्षियों को प्रारंभ में अजीमगंज सराय के आसपास बनाए गए अस्थायी बाड़ों में रखा गया। अजीमगंज सराय मुगल काल में यात्रियों के अस्थायी ठहराव के लिए निर्मित एक घिरे हुए चौकोर प्रांगण के रूप में जाना जाता था। बाघ, तेंदुआ, भालू, लोमड़ी, बंदर, हिरण, मृग तथा विभिन्न पक्षियों सहित पशु-पक्षियों के इस संग्रह को अंततः उनके स्थायी बाड़ों में स्थानांतरित कर दिया गया। इस पार्क का औपचारिक उद्घाटन 1 नवंबर, 1959 को भारत सरकार के माननीय मंत्री श्री पंजाब राव देशमुख द्वारा किया गया। प्रारंभ में इस पार्क को ‘दिल्ली चिड़ियाघर’ के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1982 में इसे ‘राष्ट्रीय प्राणी उद्यान’ का दर्जा प्रदान किया गया, जिसका उद्देश्य इसे देश के एक आदर्श प्राणी उद्यान के रूप में विकसित करना था।

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में पक्षियों और वन्यजीवों को ऐसे वातावरण में रखा जाता है, जो कई मायनों में उनके प्राकृतिक आवास के समान है। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान न केवल संकटग्रस्त प्रजातियों को सुरक्षित आवास प्रदान करता है, बल्कि उन्हें नियंत्रित एवं संरक्षित परिस्थितियों में प्रजनन करने में भी सहायता करता है। भविष्य में इन प्रजातियों की संख्या इतनी बढ़ सकती है कि वे पुनः अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से पनप सकें।

Zoo Assistant